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शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

स्टूडियो में बैठकर रामायण की रचना नहीं हो सकती।

शास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। 

भूप सुसेवित बस नहिं लेखिअ॥


परशुराम-लक्ष्मण संवाद की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में की है। वाल्मीकि कृत रामायण में तो परशुराम जी महाराजा दशरथ से भी बात नहीं करते। वह केवल श्रीराम को चुनौती देते हैं। वह भी तब जब बारात लौट रही है। भगवान विष्णु के दिए हुए धनुष पर बाण संधान कर देने मात्र से उनका क्रोध जाता रहता है। वहीं वह कहते हैं कि उनके पुण्य का क्षय कर दीजिए, महेंद्रगिरी पर्वत तक आने जाने की दिव्य शक्ति बनी रहे, यह अपेक्षित रखकर।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने परशुराम का आगमन और संवाद धनुषभंग के तुरंत बाद ही करा दिया है। यहां लक्ष्मण के साथ उनका संवाद बहुत चुटीला, हास्य और व्यंग्य से युक्त और लोकरंजक है। तुलसीदास जी ने इस प्रसंग में शस्त्रधारी ब्राह्मण को नीचा दिखाया है और सूर्यवंशी कर्तव्यनिष्ठ क्षत्रिय को श्रेष्ठ। 


केशवदास ने रामचंद्रिका में परशुराम जी का संवाद चारो भाइयों से दिखा दिया है। भरत पूछते हैं कि यह कौन हैं? लक्ष्मण उन्हें रोष में लाने वाले कटु वचन कहते हैं और इस अवसर पर राम भी क्रुद्ध हो जाते हैं। जब श्रीराम और परशुराम युद्ध के लिए उद्धत हो जाते हैं तो भगवान शिव उपस्थित होकर सुलह कराते हैं।


राम-राम जब कोप करयो जू । 

लोक-लोक भय भूरि भरयो जू ।

बामदेव तब श्रापुन आये । 

रामदेव दोउन समझाये ।।


भगवान शिव तब वहां आये और दोनों रामदेव को समझाया। दोनों रामदेव? तुलसीदास जी ने श्रीराम के मुख से कहलवाया है - 

"राम मात्र लघु नाम हमारा।

परसु सहित बड़ नाम तोहारा।।" दोनों राम हैं। दोनों भगवान विष्णु के अवतार हैं। 


इसके बाद परशुराम श्रीराम को धनुष देकर चले जाते हैं। परशुराम की छवि कुठार और धनुष बाण दोनों से बनती है। धनुष अदृश्य नहीं है उनके यहां। 


#RamayanaMovie में परशुराम के हाथ में विचित्र कुल्हाड़ी दी हुई है। उसे वह चला कर मारते हैं! हद है! फिर अगले ही क्षण धनुष को प्रकट करते हैं और देते हैं। देते समय घुटने के बल बैठे हुए हैं!


थोड़ी सी चिंता गरिमा, मर्यादा आदि की कर लेनी चाहिए। इन तत्वों की ओर ध्यान देना चाहिए। सेट को समझना चाहिए। 


श्रीराम बारात लेकर लौट रहे हैं! जहां यह घटित होता दिखाया गया है,वहां कुछ ही दूरी पर पहाड़ दिखाया गया है! जनकपुरी से अयोध्या मार्ग में पहाड़ है? वह भी हिमाच्छादित? इस दृश्य के पार्श्व में दिखता है। फिल्म में है।


स्टूडियो में बैठकर #रामायण की रचना नहीं हो सकती।

सद्य: आलोकित!

स्टूडियो में बैठकर रामायण की रचना नहीं हो सकती।

शास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ।  भूप सुसेवित बस नहिं लेखिअ॥ परशुराम-लक्ष्मण संवाद की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में की है। ...

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