मुझे बच्चों के विद्यालय की टाइमिंग 7:00AM-2:00PM आज तक समझ में नहीं आई। बच्चों की सुबह कभी भी सुखद और सुकून वाली नहीं होती। वह सोकर उठते ही विद्यालय की चिंता करने लगते हैं। न संध्या वंदन और न योगाभ्यास आदि! ठीक से कलेवा करने का अवसर भी नहीं रहता। शायद ही कोई बच्चा पाठ पढ़कर विद्यालय जाता हो, जिसे अध्यापक कक्षा में पढ़ाएंगे!
खड़ी दुपहर को वह लौटते हैं। उन्हें
ठोक-पीटकर सुला दिया जाता है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक नहीं है। यदि कोई ध्यान से देख रहा है तो वह इस
समय सारिणी में बदलाव करने पर विचार करे।
और हाँ, कोचिंग बंद करो!
#SchoolEducation
