शनिवार, 5 सितंबर 2026

डायरी - स्कूल शिक्षा 3

स्कूल की टाइमिंग को लेकर मेरे पोस्ट डायरी : स्कूल शिक्षा 1 की बहुत सराहना हुई। थोड़ी सी आलोचना भी। लेकिन अधिकांश लोगों ने स्वीकार किया कि वर्तमान टाइमिंग निश्चित करने में कोचिंग सेंटर की अहम भूमिका है। कोचिंग का ज्वर कुसंग के ज्वर से भी भयानक है। दुर्भाग्य से यह बीमारी सबको लगी हुई है। महंगी से महंगी शिक्षा देने वाले निजी विद्यालयों के बच्चे बिना ट्यूशन और कोचिंग के नहीं रह रहे हैं।


बहुत से लोगों का कहना है कि सरकारी विद्यालय अक्षम हैं इसलिए कोचिंग फल फूल रहे हैं। यदि ऐसा है तो निजी विद्यालयों के बच्चे कोचिंग क्यों जा रहे हैं? कोचिंग सेंटर का नेक्सस इतना जब्बर हो गया है कि आप इनसे बच नहीं सकते। यह लोग हर जगह काबिज हैं और अशक्त तथा अक्षम लोगोंको विभिन्न ट्रिक और सेटिंग के बूते जिम्मेदार पदों पर बिठा दे रहे हैं। इनका गठजोड़ बहुत मजबूत हो गया है।


इसका उपाय यही है कि इन कोचिंग सेंटर पर प्रतिबंध लगाया जाए। कितनी विडंबना की बात है कि सरकारी विद्यालय के अध्यापकों को कोचिंग पढ़ाने से रोका जा रहा है लेकिन निजी सेंटर्स को खुली छूट दी गई है। उनको जांचने, समझने का कोई निगरानी तंत्र भी नहीं है। उच्चाधिकारी उनके प्रभाव में हैं।


मैं #SchoolEducation के सम्बन्ध में पुरजोर सिफारिश करूंगा कि कोचिंग संस्थान बंद किए जाएं। इन्हें चलाना अपराध माना जाए।



इसके बाद विद्यालय, शिक्षा आदि की व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।


आप क्या कहते हैं? अपनी राय से अवगत कराएं। सहमत/असहमत भी लिख सकते हैं।

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सद्य: आलोकित!

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