गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

पीला खून पीली रोशनाई- राही मासूम रज़ा

   
    सिदाक़त हुसैन राही मासूम रज़ा का छद्म नाम था। राही मासूम रज़ा कई छद्म नाम से लिखते थे। सिदाक़त हुसैन नाम से उनका स्तम्भ 'माधुरी' में छपता था। यह एक दुर्लभ स्तम्भ आज अरविंद कुमार के सौजन्य से प्राप्त हुआ।

सोमवार, 24 दिसंबर 2018

क्रिसमस इव पर विशेष

      बीते दिन अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की यह तस्वीर देखने को मिली। बराक संता की भूमिका में हैं। इस तस्वीर को देखते हुए विचारों की श्रृंखला बन गयी। 
      अव्वल तो यह खयाल आया कि अमरीका और यूरोपीय देशों के राजनयिक यह सब सहजता से कर सकते हैं तो विकासशील देशों विशेषतः भारत जैसे देश के राजनेता ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर सकते। धर्मनिरपेक्षता एक घटिया बहाना है। उनका स्टेटस और वीआईपी बने रहने की चाह और वोट बैंक की परवाह बड़ा कारण है।
     ईसाइयत इतनी शक्तिशाली धारा है कि दुनिया के सभी दूसरे धर्म भीषण दबाव में हैं। हिन्दू धर्म टिका है तो अपनी समृद्ध और शानदार बौद्धिक परम्परा की वजह से। इस्लाम ताकत और कट्टरता से सहज प्रतिरोधी है। जिन देशों में बौद्ध धर्म है, वह सबसे अधिक संकट से जूझ रहे हैं। शेष पर कभी संता गिफ्ट देने के बहाने हावी है तो कभी, चर्च की नौटंकी, यीशु के दरबार, अस्पताल, पब्लिक स्कूल, पढ़ाई, पाठ्यक्रम के जरिये हमलावर है। पढ़ाई लिखाई में उसने मदरसों और आश्रमों की व्यवस्था को पोंगापंथी घोषित करवा रखा है और बुद्धिविलासियों की एक जमात खड़ी कर दी है। जब हमने कहा कि एक गड़ेरिये (ईसा) की जयंती का उत्सव दुनिया भर में एक सप्ताह से अधिक मनाया जा सकता है तो देश के प्रधानमंत्री चरण सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती का उत्सव दो दिन लगातार क्यों नहीं मना सकते, तो श्रोताओं में से कुछ ने 'धिक्कार' कहा। कुछ ने कहा कि सोचने की बात है। एक ने पूछा कि तारीख में BC अगर ईसा से पहले है तो इसे MC के तुरंत बाद शुरू हो जाना चाहिए। MC माने मैरी क्रिसमस। तो इसका जवाब यह है कि ईसा का जन्मोत्सव एक सप्ताह मनाने के बाद नए वर्ष की शुरुआत मान ली जाए, इसलिए।
      ओबामा की यह छवि बेहद खूबसूरत है। वह अपने पिटारे में रखकर चलता है बाइबिल। रात के समय जब आप सोते रहते हैं, वह आपके मेधा पर छा जाता है। कहता है- विज्ञान, चिकित्सा, शिक्षा, नौकरी, रोजगार सबका स्रोत है बाइबिल। बाइबिल की भाषा है अंग्रेजी। आपको अंग्रेजी नहीं आती- कोई बात नहीं। आप सीखें- हेलो, गुड मॉर्निंग, गुड नाईट, (गुड फ्राइडे भी!) हैप्पी बर्थडे, rip, ओके भी। उसके बाद तो आप हगी-मुत्ति सब सीख लेंगे।
ओबामा जब यह लेकर निकला है तो वह संता को घर घर पहुंचा रहा है। उस गड़ेरिये को घर घर में प्रवेश दे रहा है। हमारे राजनेता क्या कर रहे हैं? दलित, जाट, मुसलमान, आतंकवादी आदि इत्यादि खांचे में बांट रहे हैं। एक उठता है तो कहेगा कि राम की कहानी काल्पनिक है और दूसरा उठकर बताएगा कि कृष्ण ने कौरवों से छल किया। गांधी का एक अध्येता गोमांस भक्षण करते हुए अतिशय गौरव महसूस करेगा।
      तो ओबामा की यह छवि विशेष है। जब वह चुनाव लड़ रहे थे तो उनके खिलाफ दो बातें जा रही थीं- 1. वह मुसलमान हैं, 2. वह अश्वेत हैं। उन्होंने सिद्ध किया कि मुसलमान तो नहीं हैं, अश्वेत होने से अधिक वह अमरीकन हैं और उससे भी अधिक ईसाइयत के आक्रांता प्रचारक हैं।
      सच कहूं तो मुझे यह तस्वीर पसंद है। चाहता हूँ कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी इस पूरे सप्ताह औरंगजेब के शासनकाल में हुए सिख दमन और सिखों की वीरता को याद करते हुए आगे आएं। प्रणब मुखर्जी दुर्गापूजा में मन से शामिल हों। हामिद अंसारी ईदगाह में सामूहिक नमाज में शरीक हों। दूसरे माननीय स्थानीय पर्व उत्सव में खूब भागीदारी करें। 
भारत की विविधधर्मी संस्कृति को खूब रंगें, उसे और रंगीन और समृद्ध बनाएं।

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

व्हाई आई लव जियो

      एक जमाना था जब मोबाइल फोन की सेवा प्रदाता कंपनियों ने लाइफ टाइम वैलिडिटी के लिए 'ऑफर' उतारा। एक रिचार्ज करने से जीवन भर इनकमिंग की सुविधा का वायदा किया गया और लोगों ने उसे किया। फिर एक दूसरा समय आया कि कॉलरेट कम करने के लिए रेट कटर पैक आये। sms के लिए अलग और वॉयस कॉल के लिए अलग। इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए एक नया पैक आया। 2g का पैक भी खासा महंगा था। फिर 3g का जमाना आया। 1gb 3g पैक के लिए 300-400₹ सामान्य बात थी। हम सब बेहतरीन सेवा के लिए इसे चुकाते रहे। मैंने तो सेवा प्रदाता कंपनियों की झंझट से बचने के लिए पोस्टपेड सेवा चुन ली। प्रीपेड और पोस्टपेड ग्राहकों को कंपनियां इतनी तरह से लूटती थीं कि बहुत सतर्क रहने पर भी आपका बैलेंस शून्य हो जाता था। बहुत घपलेबाजी थी। एक घपला तो #वोडाफोन के साथ सेवा लेते हुए यह हुआ कि मैंने 399 ₹ में एक जीबी 3g का रिचार्ज कराया और फिर गलती से 5₹ का एक छोटा रिचार्ज भी। तो कंपनी ने मेरे एक जीबी रिचार्ज को लेप्स मानकर 5₹ के रिचार्ज पैक को वैध कह दिया। कस्टमर केयर ने इस मामले में नियमों का हवाला दिया और हम मायूस होकर कारवां लुटते हुए देखते रहे। खैर!
        इसके बाद एक दिन #जिओ आ गया। फ्री। एकदम मुफ्त। बस फोन 4g चाहिए। कोई पैसा नहीं। इंटरनेट मुफ्त। तेज़ इंटरनेट। बातें मुफ्त। sms मुफ्त। रोमिंग में भी मुफ्त। साल भर मुफ्त। बाद में तय करेंगे कि क्या कीमत होगी।
       जब कीमत निश्चित की तो 399₹ में तीन माह तक सब कुछ एक दायरे में अनलिमिटेड! शेष सभी सेवा प्रदाता कंपनियों ने भी इस प्रतिस्पर्धा में ठहरने के लिए अपने दरों में कटौती की। लगभग जिओ के समकक्ष आये। लेकिन यह सेवा 4g के लिए थी। जिनके पास सामान्य फोन था, उनसे वही लूट जारी थी। तो जिओ ने एक हैंडसेट उतारा और अब 49₹ में एक माह तक सब कुछ मुफ्त। सामान्य फोन वालों को टारगेट करके जो सेवा प्रदाता कंपनियां हैं, उन्होंने इसके बावजूद अब नया नखरा शुरू किया है।
        वोडाफोन, आइडिया और एयरटेल ने अब कहना शुरू किया है कि इनकमिंग की वैलिडिटी के लिए भी हर महीने रिचार्ज कराना पड़ेगा। लाइफटाइम वैलिडिटी रिचार्ज के बाद यह नियमित रिचार्ज कराना होगा। हमलोग जो 4g सेवाएं इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इस नियम से शायद कोई फर्क नहीं पड़ रहा लेकिन करोड़ो सामान्य फ़ोनधारक लोग इससे चिन्ता में हैं।
मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों ने संगठित लूट की थी। भांति भांति तरीके की। जिओ को आप चाहे जितना कोसें और नेटवर्क की गुणवत्ता के लिए दुत्कारें, उसने इस नेक्सस को ध्वस्त कर दिया है।
         बीते दिन मेरे वोडाफोन नम्बर पर न्यूनतम रिचार्ज न करने पर आउटगोइंग सुविधा बंद करने की धमकी आने लगी तो मैं परेशान हुआ। इससे पहले मैं जिओ की सेवाओं से कई बार आजिज आ चुका था और बारहा सोचता था कि कोई दूसरी सेवा चुन लूंगा। दो सिम है तो एक अन्य का विकल्प हमेशा था। मैं दूसरी सेवा चुनने को सोचता था तो अगले क्षण मुझे वोडाफोन, आइडिया और एयरटेल की लूट याद आ जाती थी और मैं जिओ से और प्यार करने लगता था। अब जब वोडाफोन ने धमकी देनी शुरू की तो मेरा प्यार और उमड़ा। लेकिन अपनी ही कंपनी के दो सिम कार्ड को एक साथ रखने का स्पेस जिओ नहीं देता, इसलिए वोडाफोन को आज bsnl में बदलवाने के लिए अर्जी दे आया। आखिरकार यह सरकारी उपक्रम है।
          तो सेवाएं हो सकता है कि जिओ कभी कभी घटिया दे दे, हम उससे परेशानी महसूस करें लेकिन सबको औकात में लाने वाली और हमारे हितार्थ काम करने वाली वही समझ में आती है। 

           इसलिए आई लव जियो।

सद्य: आलोकित!

रसप्रिया: फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी

धूल में पड़े क़ीमती पत्थर को देखकर जौहरी की आँखों में एक नई झलक झिलमिला गई-अपरूप-रूप! चरवाहा मोहना छौंड़ा को देखते ही पंचकौड़ी मिरदंगिया क...