शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

फॉकलैंड समस्या और विश्व

 फाकलैंड द्वीप बहुत छोटा है। वह अर्जेंटीना के निकट है, लगभग पांच सौ किमी दूर। ब्रिटेन से 12 हजार किमी दूर। चाहिए तो यह कि फाकलैंड का अपना स्वतंत्र अस्तित्व हो लेकिन बहुत छोटा क्षेत्र होना कई समस्याओं को जन्म देता है इसलिए उसे निकटवर्ती बड़े क्षेत्र के साथ रहना चाहिए। यही स्वाभाविक है। परन्तु हुआ यह है कि 12 हजार किमी दूर से जाकर ब्रितानियों ने वहां अधिकार जमाया हुआ है। अपने नागरिक वहां बसा रखे हैं।


जिन जिन देशों के उपनिवेश बने, सबने अपने एजेंडे उन कालोनियों पर थोप दिए। अपने प्रशासक और नागरिक बसा दिए। फ्रांस, इंग्लैंड, स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैंड सबने यह किया।


1939-45 तक जो घमासान युद्ध हुआ था, उसके बाद यूरोपीय देशों ने अपने उपनिवेश स्वाधीन कर दिए थे लेकिन तब यह शत प्रतिशत नहीं हुआ था। अभी भी उनका अधिकार दुनिया के कई हिस्सों पर है। स्वाधीनता, समानता और विश्व बंधुत्व का नारा लगाने वाले यूरोपीय अभी भी अत्याचारी की भूमिका में हैं और अतिक्रमणकारी हैं।



फाकलैंड का प्रकरण ऐसा ही है। 12 हजार किमी दूर के देश ब्रिटेन का फाकलैंड पर अधिकार अस्वाभाविक है। अर्जेंटीना इस बात को विभिन्न मंचों पर उठा रहा है। कल एक पोस्टर में भी यह अभिव्यक्त हुआ है।


दुनिया के उच्च संघों को चाहिए कि वह दुनिया के देशों को फिर से देखें। क्षेत्रों का पुनर्निधारण हो। उपनिवेश समाप्त हों। अमरीका भी अपनी दादागिरी बंद करे।

मंगलवार, 30 जून 2026

लंगड़ा आम के पक्ष में

 जब मेरे सामने कोई व्यक्ति लंगड़ा आम छोड़कर दशहरी के सम्बन्ध में पूछताछ करता है तो मैं उसे नौसिखिया मानकर देखता हूं। आजकल लंगड़ा आम मुझे मिल ही जा रहा है। दुकानदार जब मुझे बताता है कि आम लंगड़ा है तो मैं सोचता हूं कि इसे गुणवान की परख नहीं। जो व्यक्ति दूर से आम देखकर खिंचा चला आया है और आम की कई किस्मों में केवल लंगड़े के सम्बन्ध में जानकारी ले रहा है, उसे आम का पारखी समझना चाहिए।

लंगड़ा आम 


वैसे तो मैं प्रतिदिन ही #चार_आम मार दे रहा हूं। (हालांकि एक बैठक में नहीं!) लेकिन आज मैंने जो खाए, वह सही मायने में राजा थे।




लंगड़ा आम अपने काषाय वल्कल के लिए पहचाना जाता है। चाकू से काट कर खाने वाले लोगों की तो यहां कोई बात ही नहीं है! इसलिए वो लोग आम प्रेमी न मानें। आदिम तरीके से आम खाने पर लंगड़ा आम परेशान कर सकता है लेकिन जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि आम को धैर्य के साथ खाना है। वल्कल उतारने में ही आपने शीघ्रता कर दी है तो आप कहां ठहरेंगे! शनै: शनै: आप इससे परिचित होते जाते हैं।


शास्त्रों में कहा गया है कि आग, स्त्री और घोड़े का मुंह पवित्र होता है। इसमें एक और चीज जोड़ना था। आग, स्त्री, घोड़े का मुंह और लंगड़ा आम; यह सदैव पवित्र होते हैं। इस आम को प्रिया की भाँति बरतना चाहिए।


केवल लंगड़ा आम ही ऐसा है जिसका बोकला उतारने के बाद आप भरपूर क्षमता से आक्रामक हो सकते हैं और अपनी क्षुधा शांत कर सकते हैं।


अंत में, इस आम की कोइली (गुठली) को इस तरह साफ करना चाहिए कि यह उगे न। वैसे भी भूमिहारों की गुठली उगने योग्य नहीं बचती।


आपने यह आम खाया है?

रविवार, 28 जून 2026

Etawah Lion 🦁 safari

Etawah Lion 🦁 safari park 
A visit with friends!

Spectacular. Incredible. Beautiful. Be sure to come to experience the thrill of wildlife. Lions roar as you pass by every morning. Spotted Spotted Deer, Bears, and Deer are also visible here. This is one of the best places in Etawah.

Accessible bus service is now available. But a safari is not a fun experience.

























 

सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

सेन संग चतुरंग अपारा

 सेन संग चतुरंग अपारा।


हाथी, घोड़ा, रथ और पैदल सैनिक; जिस सेना में यह चार अंग हों, उसको #चतुरंगिणी कहा जाता है। एक शक्तिशाली सम्राट अपनी सेना में इन चारो अंग पर विशेष ध्यान देता है। प्राचीन ग्रंथों में यह बारंबार उल्लिखित हुआ है जो सैन्य संगठन की #संस्कृति का परिचय भी है।



#शब्द

मंगलवार, 13 जनवरी 2026

शिश्नोदरी

शिश्नोदरी शब्द संस्कृत से लिया गया है, जो 'शिश्नोदरपरायण' का रूप है। इसका अर्थ है वह व्यक्ति जो केवल पेट (उदर) और जननेंद्रिय (शिश्न) की तृप्ति में लगा रहता है

प्रतीकात्मक छवि


, अर्थात भोजन और कामवासना में डूबा हुआ, पशुवत जीवन जीने वाला। 


प्रश्न यह है कि शिश्नोदरी कहने से आपको किस समुदाय का ध्यान सबसे पहले आता है?


शिश्नोदरी शब्द का प्रयोग आचार्य कुबेरनाथ राय ने अपने निबंधों में कई जगह किया है। 

मंगलवार, 6 जनवरी 2026

नाम एकतनु हेतु तेहि, देह न धरि बहोरि!

नाम एकतनु हेतु तेहि, देह न धरि बहोरि!


रावण के पूर्व जन्म की कहानी में #एकतनु नामक चरित्र है।प्रतापभानु से पराजित एक राजा ने छल करने के लिए यह नाम रखा था। वह कहता है कि जब सृष्टि बनी तब मैं उपजा और तबसे इसी रूप में हूं। आशय कि वह सृष्टि का समवयसी है। इसे समझकर मुझे अमीबा का ध्यान आया जो एक कोशीय जीव है। और सृष्टि में सबसे पहला जीव माना जाता है।


#संस्कृति #शब्द


चौपाई


तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।

प्रभु जानत सब बिनहिं जनाएँ। कहहु कवनि सिधि लोक रिझाएँ।।

तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।

अब जौं तात दुरावउँ तोही। दारुन दोष घटइ अति मोही।।

जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा।।

देखा स्वबस कर्म मन बानी। तब बोला तापस बगध्यानी।।

नाम हमार एकतनु भाई। सुनि नृप बोले पुनि सिरु नाई।।

कहहु नाम कर अरथ बखानी। मोहि सेवक अति आपन जानी।।


दोहा/सोरठा



आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।

नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि।।

शनिवार, 3 जनवरी 2026

नेति नेति जेहि बेद निरूपा।

नेति नेति जेहि बेद निरूपा।

ब्रह्म क्या है ? इसका प्रतिपादन करने के लिए #नेति_नेति सूत्र है। अव्यक्त भाव को "यह नहीं है, यह नहीं है" से जानते हैं। ब्रह्म को "यह नहीं है" कहकर अलगाने की चेष्टा की गई है। तुलसीदास जी कहते हैं कि वह प्रेम से सहज प्राप्त हो जाता है।


चौपाई

करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।

पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।

उर अभिलाष निंरंतर होई। देखअ नयन परम प्रभु सोई।।

अगुन अखंड अनंत अनादी। जेहि चिंतहिं परमारथबादी।।

नेति नेति जेहि बेद निरूपा। निजानंद निरुपाधि अनूपा।।

संभु बिरंचि बिष्नु भगवाना। उपजहिं जासु अंस तें नाना।।

ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।

जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।


दोहा/सोरठा

एहि बिधि बीतें बरष षट सहस बारि आहार।

संबत सप्त सहस्त्र पुनि रहे समीर अधार।।


#संस्कृति #शब्द

सद्य: आलोकित!

फॉकलैंड समस्या और विश्व

 फाकलैंड द्वीप बहुत छोटा है। वह अर्जेंटीना के निकट है, लगभग पांच सौ किमी दूर। ब्रिटेन से 12 हजार किमी दूर। चाहिए तो यह कि फाकलैंड का अपना स्...

आपने जब देखा, तब की संख्या.