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मंगलवार, 1 सितंबर 2026

डायरी- स्कूल शिक्षा 1

मुझे बच्चों के विद्यालय की टाइमिंग 7:00AM-2:00PM आज तक समझ में नहीं आई। बच्चों की सुबह कभी भी सुखद और सुकून वाली नहीं होती। वह सोकर उठते ही विद्यालय की चिंता करने लगते हैं। न संध्या वंदन और न योगाभ्यास आदि! ठीक से कलेवा करने का अवसर भी नहीं रहता। शायद ही कोई बच्चा पाठ पढ़कर विद्यालय जाता हो, जिसे अध्यापक कक्षा में पढ़ाएंगे!

खड़ी दुपहर को वह लौटते हैं। उन्हें ठोक-पीटकर सुला दिया जाता है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक नहीं है। यदि कोई ध्यान से देख रहा है तो वह इस समय सारिणी में बदलाव करने पर विचार करे।

सही समय 10 am से 4 pm का ही है। वही पुराना वाला.

 

और हाँ, कोचिंग बंद करो! #SchoolEducation



सद्य: आलोकित!

मेरा प्रतिनिधि रघुवीर सहाय की कविता

उसके दिल की धड़कन उस दिल की धड़कन है भीड़ के शिकार के सीने में जो है। हाहाकार उठता है घोष कर एक जन उठता है रोषकर व्याकुल आत्मा से आक्रोश कर अकस...

आपने जब देखा, तब की संख्या.