रविवार, 11 फ़रवरी 2024

शिविका : मानस शब्द संस्कृति

शिविका : मानस शब्द संस्कृति 

 

सिबिका सुभग न जाहिं बखानी।
चढ़ि चढ़ि चलत भईं सब रानी॥

सुकुमार, अक्षम, रोगी, वयोवृद्ध और दूल्हा-दुल्हन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए कुटियानुमा बनाई गई पालकी #शिविका कही जाती है। इसमें आगे और पीछे एक बांस नुमा लकड़ी निकली रहती है जिसे कंधे पर रखकर कहार ले जाते हैं।
#मानस_शब्द #संस्कृति

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सद्य: आलोकित!

घनआनंद : रामचंद्र शुक्ल

ये साक्षात् रसमूर्ति और ब्रजभाषा के प्रधान स्तंभों में हैं। इनका जन्म संवत् १७४६ के लगभग हुआ था और ये संवत् १७९६ में नादिरशाही में मारे गए। ...

आपने जब देखा, तब की संख्या.