रविवार, 9 अगस्त 2026

अंग्रेजी और भारतीय खान-पान में कौन श्रेष्ठ है?

खान पान के मामले में कौन समृद्ध है, भारतीय या अंग्रेज? अच्छा और विविधतापूर्ण खाना कौन खाता है?


खान-पान के मामले में भारतीय व्यंजन स्पष्ट रूप से ज्यादा समृद्ध और विविधतापूर्ण हैं। अंग्रेजी (ब्रिटिश) खाना भी अच्छा है, लेकिन तुलना में भारतीय खाना बहुत आगे है। आइए तथ्यों के आधार पर समझते हैं:



1. विविधता (Diversity) में कौन आगे?

  • भारतीय खाना: भारत की जलवायु, भूगोल, धर्म, जाति और क्षेत्रीय संस्कृतियों के कारण व्यंजनों की विविधता दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है।
    उत्तर भारत का मुगलई/पंजाबी (बिरयानी, रोटी, दाल-मक्खनी), दक्षिण का चावल-आधारित (इडली, डोसा, सांभर, नारियल करी), पश्चिम का गुजराती-राजस्थानी (थाली, मीठे-खट्टे स्वाद), पूर्व का बंगाली-ओडिया (मछली, सरसों), पूर्वोत्तर का अलग स्वाद — हर 200-300 किमी पर खाना बदल जाता है। मसालों का इस्तेमाल, शाकाहारी-मांसाहारी दोनों की समृद्ध परंपरा, और हजारों व्यंजन इसे बेहद विविध बनाते हैं।
  • अंग्रेजी/ब्रिटिश खाना: पारंपरिक अंग्रेजी खाना अपेक्षाकृत सरल और सीमित है — रोस्ट डिनर, फिश एंड चिप्स, पाई, फुल इंग्लिश ब्रेकफास्ट, सॉसेज-मैश आदि। मसालों का इस्तेमाल कम, स्वाद ज्यादा हल्का और ingredient-focused। आधुनिक ब्रिटेन (खासकर लंदन) में इमिग्रेशन की वजह से बहुत विविधता आ गई है (इंडियन, चाइनीज, इटालियन, कैरिबियन आदि), लेकिन यह “अंग्रेजी मूल” खाना नहीं, बल्कि borrowed/adapted है।

निष्कर्ष: विविधता में भारतीय खाना कहीं ज्यादा समृद्ध है।

2. स्वाद, जटिलता और “अच्छा” खाना

  • भारतीय खाना मसालों, जड़ी-बूटियों और अलग-अलग कुकिंग तकनीकों (तंदूर, दम, तड़का, फर्मेंटेशन) से बेहद जटिल और लेयर्ड फ्लेवर वाला है। एक थाली में ही कई स्वाद (मीठा, खट्टा, तीखा, कड़वा) बैलेंस होते हैं।
  • अंग्रेजी खाना ज्यादातर सरल, हार्डी और comfort-oriented है। ताजे ingredients और अच्छी क्वालिटी पर फोकस रहता है, लेकिन मसालों और जटिलता में भारतीय जितना नहीं।

दुनिया के रैंकिंग में (TasteAtlas जैसे) भारतीय व्यंजन टॉप 15 में आते हैं, जबकि पारंपरिक ब्रिटिश उतना हाई रैंक नहीं करता। ब्रिटेन में भी भारतीय खाना (करी) इतना पॉपुलर है कि चिकन टिक्का मसाला को कभी-कभी “ब्रिटिश नेशनल डिश” कहा जाता है — यानी अंग्रेज खुद भारतीय स्वाद को अपना चुके हैं।

3. आधुनिक समय में

  • भारत: घर का खाना अभी भी बहुत विविध और क्षेत्रीय है। स्ट्रीट फूड, थाली कल्चर और रीजनल स्पेशलिटीज मजबूत हैं।
  • इंग्लैंड: सुपरमार्केट, टेकअवे और मल्टीकल्चरल रेस्टोरेंट्स की वजह से विकल्प ज्यादा हैं, लेकिन रोजमर्रा का पारंपरिक खाना सीमित रहता है।

कुल मिलाकर:
भारतीय खान-पान ज्यादा समृद्ध, ज्यादा विविधतापूर्ण और स्वाद के मामले में ज्यादा जटिल/अच्छा माना जाता है। अंग्रेजी खाना भी स्वादिष्ट और संतुष्ट करने वाला है (खासकर आरामदायक भोजन के लिए), लेकिन विविधता और समृद्धि में भारतीय आगे हैं।


फॉलोबाज़ी: एक नया शब्द FollowBazi : A new Word

 फॉलोबाज़ी!


यह नयाशब्द है, उस खेल और प्रक्रिया के लिए जिसमें फॉलोवर बढ़ाने के लिए तुम मुझे फॉलो करो, मै तुम्हें करता हूं सिद्धांत काम करता है। इस तरह फॉलोअर्स की संख्या काउंट करने में तो बढ़ जाती है लेकिन ऐसे लोग दुबारा आपको देखने नहीं आते। X भी ऐसे लोगों तक पोस्ट पहुँचाता नहीं, अथवा इग्नोर करता रहता है।


बोनसाई बरगद


नतीजा यह होता है कि ऐसे लोग बस गिनती के लिए रह जाते हैं।


X, facebook, instagram पर यह खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है और फल फूल रहा है।


इस बढ़ती प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर यह नया शब्द चलन में आ रहा है - फॉलोबाज़ी!


#शब्द_चर्चा

मंगलवार, 21 जुलाई 2026

परदखिना करि करहिं प्रनामा।

परदखिना करि करहिं प्रनामा।

श्रीरामचरितमानस की यह पंक्ति केवल एक क्रिया का वर्णन नहीं करती, बल्कि भक्ति, समर्पण और आदर की पराकाष्ठा को दर्शाती है। गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने मानस में जिस सुंदर भाव से 'प्रदक्षिणा' शब्द को पिरोया है, वह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का मूल दर्शन है।

आइए, इस भावपूर्ण प्रसंग और 'प्रदक्षिणा' के आध्यात्मिक रहस्य का विस्तार से अवलोकन करें:

 १. शब्द का अर्थ और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

 दक्षिणावर्त गति: प्रदक्षिणा शब्द का सीधा अर्थ है—'दक्षिण' (दाएं) ओर से घूमना। जब हम किसी पूज्य व्यक्ति, विग्रह या पवित्र स्थान के चारों ओर इस प्रकार घूमते हैं कि वह स्थान सदा हमारे दाहिनी ओर रहे, तो उसे प्रदक्षिणा या परिक्रमा कहा जाता है।



केंद्र में परमेश्वर: आध्यात्मिक दृष्टि से, प्रदक्षिणा का अर्थ है अपने जीवन के केंद्र में ईश्वर (या अपने पूज्य) को स्थापित करना। जब हम चक्कर काटते हैं, तो यह स्वीकार करते हैं कि हमारी पूरी सृष्टि, हमारी विचार-धारा और हमारा अस्तित्व केवल उसी एक 'केंद्र' के इर्द-गिर्द घूमता है।


२. मानस प्रसंग: भरत जी का अनुपम प्रेम

चित्रकूट की पावन भूमि हो या अयोध्या का आंगन, श्री भरत जी का चरित्र समर्पण का सर्वोच्च शिखर है।

परदखिना करि करहिं प्रनामा। देहिं देवतन्हि दूषन नामा॥

जब श्री भरत जी चित्रकूट में प्रभु श्री राम से जुड़े स्थानों—उनकी पर्णकुटी, उनके मार्ग, और चरणों की रज को देखते हैं—तो वे केवल प्रणाम नहीं करते, बल्कि अश्रुपूरित नेत्रों से उनकी प्रदक्षिणा करते हैं।

 सर्वस्व न्यौछावर करने का भाव: भरत जी के लिए श्रीराम केवल भाई नहीं, उनके आराध्य हैं। किसी वस्तु की परिक्रमा करने का अर्थ है—"मेरा जो कुछ भी है, इस स्थान और इसके स्वामी पर समर्पित है।" वे राम से जुड़ी हर कंकड़ी, हर वृक्ष और हर कण को पूज्य मानते हैं। यह भक्ति का वह रूप है जहाँ भक्त अपने आराध्य से जुड़ी हर सूक्ष्म वस्तु में भी ईश्वर का ही स्वरूप देखता है।

३. प्रदक्षिणा का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व

भारतीय संस्कृति में परिक्रमा का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि गहरा व्यावहारिक और ऊर्जात्मक पहलू भी है:

सकारात्मक ऊर्जा का संचय: पूज्य स्थानों, मंदिरों और पवित्र वृक्षों (जैसे पीपल, तुलसी) में एक विशेष ऊर्जा क्षेत्र (Energy Field) होता है। जब हम उसके दाहिनी ओर से घूमते हैं, तो हमारे शरीर में सकारात्मक तरंगों का प्रवाह होता है।

अहंकार का विसर्जन: गोल घूमकर बार-बार झुकना और प्रणाम करना मनुष्य के भीतर से 'मैं' (अहंकार) को समाप्त करता है।

पूर्ण समर्पण: जीवन का चक्र भी प्रदक्षिणा जैसा ही है—जहाँ से यात्रा शुरू होती है, अंततः वहीं आकर समाप्त होती है। परिक्रमा करके साधक यह प्रार्थना करता है कि उसका अंतिम आश्रय केवल ईश्वर का चरण-कमल ही हो।

💡 निष्कर्ष

'परदखिना' मात्र एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मन को पूरी तरह शांत और समर्पित कर देने का एक जरिया है। भरत जी का यह भाव हमें सिखाता है कि प्रेम में केवल पाना महत्वपूर्ण नहीं है; आराध्य के प्रति आदर, श्रद्धा और उनके प्रति स्वयं को पूरी तरह से विसर्जित कर देना ही सच्ची भक्ति है।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

फॉकलैंड समस्या और विश्व

 फाकलैंड द्वीप बहुत छोटा है। वह अर्जेंटीना के निकट है, लगभग पांच सौ किमी दूर। ब्रिटेन से 12 हजार किमी दूर। चाहिए तो यह कि फाकलैंड का अपना स्वतंत्र अस्तित्व हो लेकिन बहुत छोटा क्षेत्र होना कई समस्याओं को जन्म देता है इसलिए उसे निकटवर्ती बड़े क्षेत्र के साथ रहना चाहिए। यही स्वाभाविक है। परन्तु हुआ यह है कि 12 हजार किमी दूर से जाकर ब्रितानियों ने वहां अधिकार जमाया हुआ है। अपने नागरिक वहां बसा रखे हैं।


जिन जिन देशों के उपनिवेश बने, सबने अपने एजेंडे उन कालोनियों पर थोप दिए। अपने प्रशासक और नागरिक बसा दिए। फ्रांस, इंग्लैंड, स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैंड सबने यह किया।


1939-45 तक जो घमासान युद्ध हुआ था, उसके बाद यूरोपीय देशों ने अपने उपनिवेश स्वाधीन कर दिए थे लेकिन तब यह शत प्रतिशत नहीं हुआ था। अभी भी उनका अधिकार दुनिया के कई हिस्सों पर है। स्वाधीनता, समानता और विश्व बंधुत्व का नारा लगाने वाले यूरोपीय अभी भी अत्याचारी की भूमिका में हैं और अतिक्रमणकारी हैं।



फाकलैंड का प्रकरण ऐसा ही है। 12 हजार किमी दूर के देश ब्रिटेन का फाकलैंड पर अधिकार अस्वाभाविक है। अर्जेंटीना इस बात को विभिन्न मंचों पर उठा रहा है। कल एक पोस्टर में भी यह अभिव्यक्त हुआ है।


दुनिया के उच्च संघों को चाहिए कि वह दुनिया के देशों को फिर से देखें। क्षेत्रों का पुनर्निधारण हो। उपनिवेश समाप्त हों। अमरीका भी अपनी दादागिरी बंद करे।

मंगलवार, 30 जून 2026

लंगड़ा आम के पक्ष में

 जब मेरे सामने कोई व्यक्ति लंगड़ा आम छोड़कर दशहरी के सम्बन्ध में पूछताछ करता है तो मैं उसे नौसिखिया मानकर देखता हूं। आजकल लंगड़ा आम मुझे मिल ही जा रहा है। दुकानदार जब मुझे बताता है कि आम लंगड़ा है तो मैं सोचता हूं कि इसे गुणवान की परख नहीं। जो व्यक्ति दूर से आम देखकर खिंचा चला आया है और आम की कई किस्मों में केवल लंगड़े के सम्बन्ध में जानकारी ले रहा है, उसे आम का पारखी समझना चाहिए।

लंगड़ा आम 


वैसे तो मैं प्रतिदिन ही #चार_आम मार दे रहा हूं। (हालांकि एक बैठक में नहीं!) लेकिन आज मैंने जो खाए, वह सही मायने में राजा थे।




लंगड़ा आम अपने काषाय वल्कल के लिए पहचाना जाता है। चाकू से काट कर खाने वाले लोगों की तो यहां कोई बात ही नहीं है! इसलिए वो लोग आम प्रेमी न मानें। आदिम तरीके से आम खाने पर लंगड़ा आम परेशान कर सकता है लेकिन जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि आम को धैर्य के साथ खाना है। वल्कल उतारने में ही आपने शीघ्रता कर दी है तो आप कहां ठहरेंगे! शनै: शनै: आप इससे परिचित होते जाते हैं।


शास्त्रों में कहा गया है कि आग, स्त्री और घोड़े का मुंह पवित्र होता है। इसमें एक और चीज जोड़ना था। आग, स्त्री, घोड़े का मुंह और लंगड़ा आम; यह सदैव पवित्र होते हैं। इस आम को प्रिया की भाँति बरतना चाहिए।


केवल लंगड़ा आम ही ऐसा है जिसका बोकला उतारने के बाद आप भरपूर क्षमता से आक्रामक हो सकते हैं और अपनी क्षुधा शांत कर सकते हैं।


अंत में, इस आम की कोइली (गुठली) को इस तरह साफ करना चाहिए कि यह उगे न। वैसे भी भूमिहारों की गुठली उगने योग्य नहीं बचती।


आपने यह आम खाया है?

रविवार, 28 जून 2026

Etawah Lion 🦁 safari

Etawah Lion 🦁 safari park 
A visit with friends!

Spectacular. Incredible. Beautiful. Be sure to come to experience the thrill of wildlife. Lions roar as you pass by every morning. Spotted Spotted Deer, Bears, and Deer are also visible here. This is one of the best places in Etawah.

Accessible bus service is now available. But a safari is not a fun experience.

























 

सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

सेन संग चतुरंग अपारा

 सेन संग चतुरंग अपारा।


हाथी, घोड़ा, रथ और पैदल सैनिक; जिस सेना में यह चार अंग हों, उसको #चतुरंगिणी कहा जाता है। एक शक्तिशाली सम्राट अपनी सेना में इन चारो अंग पर विशेष ध्यान देता है। प्राचीन ग्रंथों में यह बारंबार उल्लिखित हुआ है जो सैन्य संगठन की #संस्कृति का परिचय भी है।



#शब्द

सद्य: आलोकित!

डायरी - स्कूल शिक्षा 3

स्कूल की टाइमिंग को लेकर मेरे पोस्ट  डायरी : स्कूल शिक्षा 1 की बहुत सराहना हुई। थोड़ी सी आलोचना भी। लेकिन अधिकांश लोगों ने स्वीकार किया कि ...

आपने जब देखा, तब की संख्या.