फाकलैंड द्वीप बहुत छोटा है। वह अर्जेंटीना के निकट है, लगभग पांच सौ किमी दूर। ब्रिटेन से 12 हजार किमी दूर। चाहिए तो यह कि फाकलैंड का अपना स्वतंत्र अस्तित्व हो लेकिन बहुत छोटा क्षेत्र होना कई समस्याओं को जन्म देता है इसलिए उसे निकटवर्ती बड़े क्षेत्र के साथ रहना चाहिए। यही स्वाभाविक है। परन्तु हुआ यह है कि 12 हजार किमी दूर से जाकर ब्रितानियों ने वहां अधिकार जमाया हुआ है। अपने नागरिक वहां बसा रखे हैं।
जिन जिन देशों के उपनिवेश बने, सबने अपने एजेंडे उन कालोनियों पर थोप दिए। अपने प्रशासक और नागरिक बसा दिए। फ्रांस, इंग्लैंड, स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैंड सबने यह किया।
1939-45 तक जो घमासान युद्ध हुआ था, उसके बाद यूरोपीय देशों ने अपने उपनिवेश स्वाधीन कर दिए थे लेकिन तब यह शत प्रतिशत नहीं हुआ था। अभी भी उनका अधिकार दुनिया के कई हिस्सों पर है। स्वाधीनता, समानता और विश्व बंधुत्व का नारा लगाने वाले यूरोपीय अभी भी अत्याचारी की भूमिका में हैं और अतिक्रमणकारी हैं।
फाकलैंड का प्रकरण ऐसा ही है। 12 हजार किमी दूर के देश ब्रिटेन का फाकलैंड पर अधिकार अस्वाभाविक है। अर्जेंटीना इस बात को विभिन्न मंचों पर उठा रहा है। कल एक पोस्टर में भी यह अभिव्यक्त हुआ है।
दुनिया के उच्च संघों को चाहिए कि वह दुनिया के देशों को फिर से देखें। क्षेत्रों का पुनर्निधारण हो। उपनिवेश समाप्त हों। अमरीका भी अपनी दादागिरी बंद करे।

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