शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

चतुरसम : संस्कृति का एक शब्द

मंगलमय निज निज भवन, लोगन्ह रचे बनाइ।

बीथीं सींचीं  चतुरसम  चौकें  चारु  पुराइ।


आजकल गलियों को सज्जित करने के लिए चूना गिराया जाता है। पुराने जमाने में चन्दन, केशर, कस्तूरी और कपूर को समान मात्रा में मिलाकर एक सुगंधित द्रव बनाया जाता था, जिसे #चतुरसम कहा जाता है। भगवान श्रीराम का बारात लेकर जब महाराजा दशरथ निकले तो गलियों को चतुरसम से अभिसिंचित किया गया।
यह भारतीय #संस्कृति की श्रेष्ठता का परिचायक भी है।

#शब्द

चतुरसम


कोई टिप्पणी नहीं:

सद्य: आलोकित!

घनआनंद : रामचंद्र शुक्ल

ये साक्षात् रसमूर्ति और ब्रजभाषा के प्रधान स्तंभों में हैं। इनका जन्म संवत् १७४६ के लगभग हुआ था और ये संवत् १७९६ में नादिरशाही में मारे गए। ...

आपने जब देखा, तब की संख्या.