शनिवार, 14 सितंबर 2019

कथावार्ता : मातृ-भाषा के प्रति

भारतेंदु हरिश्चंद्र

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

अंग्रेज़ी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन।
पै निज भाषाज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।।

उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय।
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय।।

निज भाषा उन्नति बिना, कबहुँ न ह्यैहैं सोय।
लाख उपाय अनेक यों भले करो किन कोय।।

इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग।
तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग।।

और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात।
निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात।।

तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय।
यह गुन भाषा और महं, कबहूँ नाहीं होय।।

विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।।

भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात।
विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात।।

सब मिल तासों छाँड़ि कै, दूजे और उपाय।
उन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय।।

1 टिप्पणी:

Hmara smaj ने कहा…

बिल्कुल उचित ज्ञान प्रदर्शित है इन दोहों में,
हम अपनी मातृभाषा में कोई भी ग्यान अधिक सरलता से सीख लेते है इसीलिए अपनी मातृभाषा का सम्मान करना
और उसे समृद्ध बनाना हमारा ही कार्य है।

आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏🙏

सद्य: आलोकित!

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty)

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। इसका उद्देश्य सिंधु नदी प्रणाली की...

आपने जब देखा, तब की संख्या.