मंगलवार, 13 जनवरी 2026

शिश्नोदरी

शिश्नोदरी शब्द संस्कृत से लिया गया है, जो 'शिश्नोदरपरायण' का रूप है। इसका अर्थ है वह व्यक्ति जो केवल पेट (उदर) और जननेंद्रिय (शिश्न) की तृप्ति में लगा रहता है

प्रतीकात्मक छवि


, अर्थात भोजन और कामवासना में डूबा हुआ, पशुवत जीवन जीने वाला। 


प्रश्न यह है कि शिश्नोदरी कहने से आपको किस समुदाय का ध्यान सबसे पहले आता है?


शिश्नोदरी शब्द का प्रयोग आचार्य कुबेरनाथ राय ने अपने निबंधों में कई जगह किया है। 

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