शनिवार, 3 जनवरी 2026

नेति नेति जेहि बेद निरूपा।

नेति नेति जेहि बेद निरूपा।

ब्रह्म क्या है ? इसका प्रतिपादन करने के लिए #नेति_नेति सूत्र है। अव्यक्त भाव को "यह नहीं है, यह नहीं है" से जानते हैं। ब्रह्म को "यह नहीं है" कहकर अलगाने की चेष्टा की गई है। तुलसीदास जी कहते हैं कि वह प्रेम से सहज प्राप्त हो जाता है।


चौपाई

करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।

पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।

उर अभिलाष निंरंतर होई। देखअ नयन परम प्रभु सोई।।

अगुन अखंड अनंत अनादी। जेहि चिंतहिं परमारथबादी।।

नेति नेति जेहि बेद निरूपा। निजानंद निरुपाधि अनूपा।।

संभु बिरंचि बिष्नु भगवाना। उपजहिं जासु अंस तें नाना।।

ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।

जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।


दोहा/सोरठा

एहि बिधि बीतें बरष षट सहस बारि आहार।

संबत सप्त सहस्त्र पुनि रहे समीर अधार।।


#संस्कृति #शब्द

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