तीरथ बर नैमिष बिख्याता।
प्राचीन ग्रंथों में एकदा की चर्चा में गोमती नदी तट के प्रसिद्ध तीर्थ #नैमिषारण्य की बात है जहां बहुत से साधक रहा करते थे। महाराज मनु ने शासन त्याग करने के बाद यहां निवास किया और #स्मृति लिपिबद्ध किया। सनातन #संस्कृति में स्मृति का बहुत महत्त्व है। स्मृतियां भारतीय समाज का दिशा निर्देशन करती थीं।
जब से विदेशियों का राज कायम हुआ, एकत्र होने और यज्ञादि पर प्रतिबंध लगा तब से स्मृति लोप बढ़ा। परिणामस्वरूप हिन्दू समाज विघटित हुआ। चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने जिस कछुआ धर्म की चर्चा की है, वह स्मृति लोप और संस्कार न होने से ही।
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| तीरथ बर नैमिष बिख्याता। |
चौपाई
बरबस राज सुतहि तब दीन्हा। नारि समेत गवन बन कीन्हा।।
तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता।।
बसहिं तहाँ मुनि सिद्ध समाजा। तहँ हियँ हरषि चलेउ मनु राजा।।
पंथ जात सोहहिं मतिधीरा। ग्यान भगति जनु धरें सरीरा।।
पहुँचे जाइ धेनुमति तीरा। हरषि नहाने निरमल नीरा।।
आए मिलन सिद्ध मुनि ग्यानी। धरम धुरंधर नृपरिषि जानी।।
जहँ जँह तीरथ रहे सुहाए। मुनिन्ह सकल सादर करवाए।।
कृस सरीर मुनिपट परिधाना। सत समाज नित सुनहिं पुराना ।
दोहा
द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।
बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग।।
नववर्ष की मंगलकामनाएं 🚩
#शब्द

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