मंगलवार, 27 अक्टूबर 2015

एकल व्याख्यानमाला में मेरा पहला व्याख्यान हो गया.

व्यख्यान की रूपरेखा

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सद्य: आलोकित!

परदखिना करि करहिं प्रनामा।

परदखिना करि करहिं प्रनामा। श्रीरामचरितमानस की यह पंक्ति केवल एक क्रिया का वर्णन नहीं करती, बल्कि भक्ति, समर्पण और आदर की पराकाष्ठा को दर्शात...

आपने जब देखा, तब की संख्या.