रविवार, 5 अगस्त 2018

धम्मपद से

चरञ्‍चे नाधिगच्छेय्य, सेय्यं सदिसमत्तनो।
एकचरियं दळ्हं कयिरा, नत्थि बाले सहायता॥
-(धम्मपद-बालवग्गो)

यदि शील, समाधि या प्रज्ञा में विचरण करते हुये अपने से श्रेष्ठ या अपना जैसा सहचर न मिले, तो दृढता के साथ अकेला विचरण करे। मूर्ख च्यक्ति से सहायता नही मिल सकती।

सद्य: आलोकित!

शिश्नोदरी

शिश्नोदरी शब्द संस्कृत से लिया गया है, जो 'शिश्नोदरपरायण' का रूप है। इसका अर्थ है वह व्यक्ति जो केवल पेट (उदर) और जननेंद्रिय (शिश्न)...

आपने जब देखा, तब की संख्या.